यह बीटल राइनोसिरस यानि गेंडे के सिर जैसे दिखाई देते है| इसलिए इसका नाम भी राइनोसिरिस बीटल (Rhinoceros beetle) रखा गया है| इसकी 4 अवस्थायें होती है- अंडा, लार्वा यानि ग्रब, प्युपा और adult | लगभग 12 दिनों तक यह अंडे मे रहता है और अगले 72 दिनो तक ग्रब में रहता है उसके बाद यह dormancy में चल कर प्युपा में बदल जाता है|
20 दिनो की प्युपा अवस्था complete करने की बाद यह पूर्ण वयस्क यानि adult में बदल जाता है| इसकी दो अवस्थायेँ ग्रब और adult ही नुकसान पहुंचाती है| यह खजूर के क्राउन में घुसकर अन्दर से काटता रहता है और इसका ग्रब या लट्ट जमीन में रहती है जो जड़ों को काटती रहती है| जिससे पौधा कुछ दिनों बाद सुख कर मर जाता है
अब बात करते है इस कीट से बचाव की....तो इसके लिए एक किलो जैविक फफूंद मेटारिजिम एनिसोप्लाई को 50-60 किलो गोबर खाद या कम्पोस्ट खाद में मिक्स कर गड़ो में मिलाना चाहिए| 10 ग्राम फिप्रोनिल 0.3% GR को बालू मिट्टी में मिलाकर खजूर के सबसे अंदर की दो पत्तियों की बीच यानि क्राउन में रख दे| ताकि कीट दूर ही रहे| जिन क्षेत्रों में इस कीट की संभावना अधिक हो वहाँ 6 महीने के अंतराल से दवा रखनी चाहिए|
राइनोसिरिस बीटल कीट का प्रकोप अधिकतर गुजरात और उसकी सीमा से लगे जिलों जैसे जालोर, सिरोही में अधिक देखा गया है क्योंकि यहाँ नमी भी अधिक होती है और अगर खजूर के पौधे का क्राउन यानि अन्दर की पत्तिए अगर जमीन से टच में है तो भी इस कीट की संभावना बढ़ जाती है|
इस कीट के adult को फसाने के लिए फेरेमोन ट्रेप आता है, जो female के abstract से तैयार किया जाता, जिसकी smell से male beetle attract होता है, इसे आर बी लुयोर नाम से जाना जाता है, इस फेरेमोन ट्रेप को 6 ट्रेप प्रति हेक्टेयर यानि 2.5 एकड़ की दर से पेड़ों के पास लगाया जाता है जिसमें नर adult beetle फंस कर मर जाते है|
इसके साथ साथ .... 10 ml imidacloprid 17.8% SL insecticide को प्रति लीटर पानी में मिलाकर फनल की सहायता से बीटल ने जहां छेद किया है, उस जगह डाले ताकि बीटल के लार्वा खत्म हो जाए या फिर प्रोफेनोफोस 50% EC 10 ml या स्पीनोसेड़ 45% SC 5 ml प्रति लीटर पाने में मिलाकर भी use कर सकते है|
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