यह मेटारीजियम एनीसोपली एक जैविक कीटनाशी के रूप में जानी जाती है, इसके mode of action, प्रयोग विधि, dose, इस्तेमाल के समय सावधानियाँ आदि पर विस्तृत जानकारी लेंगे, तो आइए शुरू करते है
जैविक कीटनाशियों का प्रचलन इसलिए बढ़ गया है क्योंकि जब हम कीटों को रोकने के लिए रासायनिक कीटनाशी का इस्तेमाल करते है तो वातावरण, पानी और जमीन तो दूषित होती ही है, साथ ही धीरे-धीरे इन कीटनाशकों का असर भी कम होने लगा है क्योंकि ये कीट रसायनों के प्रति सहनशीलता यानि resistance develop कर लेते है| जिससे कीटों की आगे की पीढ़ी पर रासायनिक insecticide का असर ही खत्म हो जाता है, इसलिए ही रासायनिक insecticide को बदल बदल के प्रयोग करना चाहिए| काफी बार देखा गया है कि पहले जिस chemical insecticide से कोई विशेष कीट को नष्ट किया जा सकता था अब उस केमिकल का असर ही नहीं होता, फिर उसके लिए कोई नया केमिकल खोजा जाता है या उससे strong chemical insecticide का उपयोग करना पड़ता है| इसलिए इस सिलसिले को रोकने के लिए और कम बजट में जैविक कीटनाशी, कारगर उपाय है और सतत उपाय है|
क्या है मेटारीजियम एनीसोपली (What is Metarhizium anisopliae)
यह एक ऐसा जैविक कवक या फंगस है, जो सभी प्रकार के फसलों, फलों एवं सब्जियों में लगने वाले सभी प्रकार के कीट जो फल के अंदर सुराख बना देते है जैसे फली बेधक, फल छेदक, इसके साथ ही सभी प्रकार के केटरपिलर जैसे तंबाकू की इल्ली, बालों वाली इल्ली, सेमीलूपर, और कई प्रकार की इल्लीयों को यह नष्ट कर देती है| रस चूसक कीट जैसे एफिड, जैसिड, thrips, मिलीबग और काटने वाले insect जैसे बीटल, कटवर्म, grass hopper, शूट बोरर, पाइरिल्ला, टिड्डा जैसे अनेक कीटों को, इसके अलावा जमीन के कीट जैसे दीमक, सफेद लट्ट, आदि को यह मेटारीजियम एनीसोपली फफूंद नष्ट करती है|
कहने का मतलब है लगभग 100 प्रकार के कीटों के विरुद्ध इसे काम में लिया जाता है| मेटारीजियम एनीसोपली ऐसी fungus है जो कीटों पर वृद्धि करती है और जमीन पर उपयुत नमी और ऑर्गैनिक मैटर होने पर जिंदा भी रहती है| यह बिना हमारी फसल को नुकसान पहुंचाए ये कार्य करती है| इसलिए इन fungus को जीवित रखने के लिए खेत में नमी और अच्छी तरह से organic matter या गोबर की खाद होना जरूरी है|
मेटारीजियम कीटनाशक की क्रिया विधि (Method of action of Metarhizium anisopliae)
मेटारीजियम कीटनाशक के Method of action की बात करे यानि यह कैसे काम करती है, तो इसके कवक बीजाणु या spore इंसेक्ट के सम्पर्क में आते हैं तो त्वचा के माध्यम से कीट के शरीर में प्रवेश करके उसमे वृद्धि करते हैं, उसमे कवक जाल बनाते है और कीट को नष्ट कर देते है| दीमक जैसे कीट जो कॉलोनी में रहते है यदि एक कीट मेटारीजियम से प्रभावित हो गया तो वह अन्य दीमक को भी संकर्मित कर देता है और पूरी कॉलोनी को बर्बाद किया जा सकता है| वैसे ही white grub जिसे गोजा लट्ट भी कहा जाता है, उसको मारने के लिए बड़े ही स्ट्रॉंग केमिकल insecticides का उपयोग किया जाता है और वह भी इतना प्रभावी नहीं रहता जितना यह फंगस करती है| जब कीट मरता है तो पहले कीट के शरीर पर सफेद रंग की कवक दिखाई देती है जो बाद में गहरे हरे रंग में बदल जाती है। यह फफूंद मिट्टी में स्वतंत्र रूप से पायी जाती है और यह कीटों में परजीवी के रूप में पायी जाती है | अतः इसे प्रयोगशाला में गुणन या मल्टीप्लाई करा कर दिया जाता है| जो बाद में हमे बाजार में मिल पाता है| मेटारीजियम एनिसोपली मनुष्य या अन्य जानवरों को संक्रमित या विषाक्त नहीं करता है तथा कम आर्द्रता और अधिक तापक्रम पर अधिक प्रभावी होता है| यह कवक 50% से कम नमी पर भी अपने बीजाणु उत्पन्न कर लेता हैं जिससे इनका जीवन चक्र मिट्टी और कीटों पर चलता रहता है|
मेटारीजियम एनीसोपली की प्रयोग विधि (Method of use of Metarhizium anisopliae)
मेटारीजियम एनिसोपली के उपयोग की बात करे तो यह पाउडर फॉर्म और लिक्विड के रूप में भी मिल जाता है| इसे मिट्टी उपचार, सिंचाई के साथ तथा छिड़काव विधि से प्रयोग किया जा सकता है| यह कीटों की सभी अवस्था पर विपरीत असर डालता है| शेड नेट, पोली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी संरचना जहां नमी बनी रहती है, वहाँ तो मेटारीजियम बहुत ही अच्छे तरीके से काम करता है|
मिटटी उपचार (Soil treatment)
मिटटी के उपचार के लिए 1 से २ किलोग्राम मेटारीजियम एनीसोपली पाउडर को 100 किलोग्राम अच्छी सड़ी गोबर की खाद में अच्छी तरह मिलाकर 20 से 25 दिन तक छाया में रखें और बीच बीच में हल्का पानी भी देते रहे| ताकि इस मित्र fungus की मात्रा को increase किया जा सके| इसके बाद खेत की अंतिम जुताई के समय जब खेत में हल्की नमी भी हो तब एक एकड़ खेत में बिखेर कर मिला दे|
पर्णीय छिड़काव (Foliar spray)
पत्तियों पर छिड़काव करने के लिए मक्का, गन्ना, अदरक, सोयाबीन, कपास, मूंगफली, ज्वार, बाजरा, धान, आलू, फलों और विभिन्न सब्जियों के लिए उपयुक्त है| इसके लिए मेटारीजियम एनीसोपली की 10 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर खड़ी फसल में सुबह अथवा शाम के समय छिड़काव करे| चिपको या स्टिकर के साथ उपयोग करने पर result अच्छा हो जाता है, क्योंकि दवा कीटों पर चिपक कर अच्छे तरीके से काम करती है| यह स्प्रे 3 से 4 बार 10 दिन के अंतराल पर दोहराए|
सिंचाई के साथ प्रयोग (Practice with irrigation)
लिक्विड मेटारीजियम एनिसोपली को बूंद बूंद करके सिंचाई के साथ देने पर मिट्टी में मौजूद सफ़ेद लट्ट, दीमक और जमीन में रहने वाले कीटों को नियंत्रण किया जा सकता है| या 2 किलो dry मेटारीजियम पाउडर और 2 किलो गुड को 200 लीटर पानी वाले ड्रम में डालकर लकड़ी या डंडे से घोल दिया जाए| डंडे से मिलाने का काम दिन में 2 बार करे, एक सुबह और एक शाम | ऐसा लगभग 4 से 5 दिन तक करे और उसके बाद सिंचाई के बहते पानी में धीरे धीरे यह लिक्विड डाल दे ताकि दवा पूरे खेत में फैल जाए| ऐसा आप ड्रिप सिस्टम और ड्रेनचिग के माध्यम से भी कर सकते है|
मेटारीजियम एनीसोपली के प्रयोग में सावधानियां (Precautions in the use of Metarhizium anisopliae)
यह biological insecticide है इसलिए बचाव और जीवित रखने के लिए कई चीजों का ध्यान रखा जाता है जैसे
- सूर्य की पराबैगनी किरणों या अधिक धूप होने पर इसका असर लगभग खत्म सा हो जाता है, अतः इसका प्रयोग सुबह या शाम में ही करना चाहिए|
- चूंकि मेटारीजियम एनिसोपली खुद एक फंगस है अतः प्रयोग से 10 दिन पहले तथा बाद में रासायनिक फफूंदनाशक का प्रयोग नही करना चाहिए| नहीं तो मेटारीजियम की fungus नष्ट हो जाएगी|
- इस मेटारीजियम एनिसोपली की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है, अतः इसको खरीदने और प्रयोग करने से पहले product की manufacturing date अवश्य देख लेनी चाहिए| अधिक समय तक पड़ी कीटनाशी के अंदर fungus मर जाती है|
- गोबर की खाद के साथ प्रयोग करने पर खेत में नमी होनी चाहिए और इसके मल्टीप्लाई के लिए पर्याप्त नमी और तापमान का होना आवश्यक है| दोपहर या गर्म दिनों में मेटारीजियम एनिसोपली के प्रयोग से बचना चाहिए| ये सब तो सावधानिया थी जिसे समझना जरूरी हो जाता है|
जाने product की efficiency को
अब बात उठती है जब हम बाजार से इस मित्र फफूंद वाली कीटनाशी को लाते है तो कैसे चेक करे की इसमें इसके spore या बीजाणु जीवित है नहीं| तो आप एक प्रयोग कर सकते है| कुछ कीटों को थर्माकोल में रख कर इन पर पीन लगा दे और इस कीटनाशी का स्प्रे हर दूसरे दिन करें| कुछ दिनों बाद आप देखेंगे कि इन insects पर fungus develop हो रही है, यानि दवा जो मार्केट से लाए है उसमें जीवित संख्या मौजूद है|
मेटारीजियम एनीसोपली की कीमत (Price of Metarhizium anisopliae)
इसकी rate की बात करें तो यह लगभग 300 से 350 रुपये प्रति किलो या प्रति लीटर के हिसाब से मिल जाएगी|
आप का कोई भी सुझाव या जानकारी सह्रदय आमंत्रित है, comment करके जरूर बताए धन्यवाद