सब्जी वर्गीय फसलों जैसे मिर्च, टमाटर, बैंगन, भिण्डी, चुकंदर, गाजर, प्याज, आलू और कद्दू वर्गीय फसलों जैसे तरबूज, खरबूज, खीरा, कद्दू आदि में, फसले जैसे- गेहूं, जौं, चावल, सोयाबीन, अरहर, मूँगफली, कॉफी, जुट आदि में, इसके अलावा यह दिक्कत फलदार पेड़ों जैसे अनार, अमरूद, नींबू, केला, नारियल, स्ट्राबेरी आदि में जड गांठ की समस्या के रूप में दिखाई देती है|
यह जड गांठ की समस्या सूत्रकृमि या निमेटोड, जो की मिट्टी मेँ पाये जाने वाला अतिसूक्ष्म जीव है, के कारण होती है| ये सूत्रकृमि पौधे की जड़ों मेँ प्रवेश करके उसमें अंडे दे देते है और जड़ों को घायल या उसमें गाँठे उत्पन्न करते है| इससे पौधे में जल और पोषक तत्व की आपूर्ति रूक जाती है| सूत्रकृमि के असर से पत्तियों में पीलापन, पौधे बौने, झाड़ीनुमा और अविकसित रह जाते है| बाद में पौधा कमज़ोर होकर खत्म हो जाता है| इसका सबसे ज्यादा असर पोलीहाउस, ग्रीनहाउस जैसी जगह पर पड़ता है क्यों यहाँ धूप कम और नमी अधिक होती है जो नेमेटोड के लिए favorable condition है|
सूत्रकृमि की मुख्य रूप से तीन प्रजाति पौधे को गंभीर नुकसान पहुंचाती है जैसे मेलाइडोगाइनी Spp. जिसमें रूट नोट निमेटोड्स आते है, ग्लोबोडेरा जिसमें पोटेटो काइस्ट निमेटोड्स आते है और तीसरा है हेटरोडेरा प्रजाति जिसमें सीरियल काइस्ट निमेटोड्स आते है|
निमेटोड्स से बचाव या कंट्रोल के उपाय कैसे करें (How to prevent or control nematodes)👇
- गेहूं, जौं और बाजरा में नेमेटोड्स से बचाने के लिए 20% नमक के घोल में यानि 5 लीटर पानी में 1 किलो नमक मिलकर बीजों को 5 मिनिट तक डुबो के रखने पर 4 डीग्री सेंटीग्रेट गर्म पानी में बीजों को 10 मिनिट रखने पर बीजो में यदि नेमेटोड्स तो नष्ट किया जा सकता है जिससे इसके प्रसार को रोका जा सकता है
- सूत्रकृमि से बचने का एक उपाय फसल चक्र है| इसमें ऐसी फसलों का चयन किया जा सकता है जिसमें सूत्रकृमि की समस्या ना होती हो| ये फसलें है- पालक, चुकंदर, ग्वार, सरसों आदि|
- क्योकि नेमिटोड के समस्या खेत से पूरी तरह से नहीं मिटती इसलिए बैगन, टमाटर, मिर्च, भिंडी, खीरा आदि फसल को खेत में 2-3 साल तक न लगाए|
- निमेटोड्स को शत्रु फसल उगाकर नेमिटोड को नष्ट किया जा सकता है| इन फसलों मेँ सरसों, गेंदा, लहसुन और शतावर प्रमुख है| इन फसलों की जड़ों मेँ ऐसे रसायनिक द्रव्य का रिसाव होता है जो सूत्रकृमि के लिए घातक है| आलू मेँ सूत्रकृमि से होने वाला सिस्ट रोग को सरसों लगाने से कम किया जा सकता है| इसी प्रकार टमाटर, बैगन या मिर्च आदि सोलेनेसी कुल की प्रजाति मेँ सूत्रकृमि की समस्या से गेंदा या फ्रेंच मेरिगोल्ड को खेत मेँ बीच बीच मेँ उगाने से यह समस्या खत्म की जा सकती है|
- सूत्रकृमि प्रतिरोधी किस्म का चयन करके सूत्रकृमि को नियंत्रित किया जा सकता है| अतः टमाटर के लिए हिसार ललित, पूसा-120, SL-120, अर्का वरदान, पूसा H-2, पूसा H-4, पी.एन.आर.-7, कल्याणपुर 1, कल्याणपुर 2, कल्याणपुर 3 ये किस्में नेमेटोड्स resistant variety है|
- बैंगन के लिए विजय हाइब्रिड, ब्लैक ब्युटी, ब्लैक राउंड, नीलकंठ, पूसा लॉन्ग पर्पल किस्म है|खरबूजा के लिए हारा मधु किस्म है| आलू के लिए कुफ़री स्वर्ण, कुफ़री थेनामलाई किस्म है| मिर्च के लिए पूसा ज्वाला, मोहिनी किस्मों का प्रयोग किया जा सकता है|
- गेहूं की राज MR-1 प्रतिरोधी किस्म है| जौं की RD-2052, RD 2035 और राजकिरन किस्में निमेटोड के प्रति प्रतिरोधी है|
- रोगग्रसित पौध से भी सूत्रकृमि का प्रसार हो सकता है इसलिए इससे प्रभावित खेत या नर्सरी से पौध रोप या मिट्टी ना ले|
- ग्रीष्मकाल मेँ गहरी जुताई करने से सूत्रकृमि के साथ अन्य कीट व रोगों के बीजाणुओं को भी नष्ट किया जा सकता है| या अधिक प्रभावी तरीका यह है कि मई-जून के महीनो मेँ गहरी जुताई करने के बाद खेत को सिंचित यानि पानी दे दिया जाता है और क्यारियाँ बनाकर पोलिथीन की शीट से ढक कर इन पोलिथीन शीट के किनारों को मिट्टी मेँ दबा दे| जिससे सूरज की धूप से शीट के अंदर का ताप इतना अधिक हो जाता है की सूत्रकृमि नष्ट हो जाते है|
- नीम, सरसों, महुआ या अरंडी की खली 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ खेत मेँ डालने से सूत्रकृमि या निमेटोड्स का प्रभाव कम हो जाता है|
- अब इसके जैविक नियंत्रण की बात कर लेते है, तो इसके लिए 2 किलो वर्टिसिलियम क्लैमाइडोस्पोरियम या 2 किलो पैसिलोमयीसिस लिलसिनस (Paecilomyces lilacinus) या 2 किलो ट्राइकोडर्मा हरजिएनम को 50 किलो अच्छी सड़ी गोबर के साथ मिलाकर प्रति एकड़ की दर से अन्तिम जुताई के समय भूमि में मिला दे|
- रसायनिक तौर पर फ्लुओपाइरम 34.48% SC (Fluopyrum 34.48% SC) यानी Bayer की वेलम प्राइम (Velum prime) के नाम से बाजार में मिलता है को drip या ड्रेंचिंग के द्वारा पौधे की जड़ों के पास दिया जाता है| इसकी dose 500 ml प्रति एकड़ है| यह केमिकल काफी प्रभावी है|
- रसायनिक कीटनाशी कार्बोफ्यूरान 3 % CG दानों को रोपाई पूर्व 10 किलो प्रति एकड़ की दर से खेत मेँ मिलाने से भी निमेटोड का असर कम हो जाता है|
- इसके अलावा पोलीहाउस वाली जमीन पर मिथाइल ब्रोमाइड (methyl bromide) से भी fumigation द्वारा control किया जा सकता है| इसके अलावा हाइड्रोजन पेराऑक्साइड का भी उपयोग पोलीहाउस में किया जाता है |