भिन्डी का यलो वेन मोजैक रोग

भिन्डी का पीला शिरा यानि यलो वेन मोजैक रोग वायरस से होता है जो रसचूसक कीटों से ओर अधिक फैलता है| यह रोग से पौधा ग्रसित हो गया तो वह ठीक नहीं हो पाता है | अतः इस रोग का रसचूसक कीटों से बचाव ही उपाय है|

यलो वेन मोजैक रोग के लक्षण (Symptoms of Yellow Vein Mosaic Disease):👇 

इस रोग के शुरुआती अवस्था में plants की पत्तियों की शिराएँ पीली पड़ जाती है और बाद की अवस्था में यह पीलापन पूरी पत्ती पर हो जाता है| ये पत्तियाँ पीली-चितकबरी होकर मुड़ने लगती हैं। इस रोग से प्रभावित fruit हल्के पीले, टेढ़े मेढ़े और सख्त हो जाते हैं।

पित शिरा रोग से बचाव (Prevention of yellow vein disease):👇 

इस रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़ कर इकठा कर लेना चाहिए और जला दें या फिर गड्ढे में डाल दें। सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए चिपचेपे ट्रैप का उपयोग कर सकते है, जिससे यह कीट इसमें आक्रशित होकर नष्ट हो जाये और रोग को अधिक न फैलाए|   

यह रोग रसचूसक कीटों mainly सफेद मक्खी (White fly) से फैलता है, इसलिए इस कीट से बचाव के लिए लिए Dimethoate 30EC @ 400 मिली दवा या Acetamiprid 20 SP@ 100 ग्राम या Diafenthiuron 50 WP @ 250 ग्राम या Pyriproxyfen 10 + Bifenthrin 10 EC @ 250 मिली या Tolfenpyrad 15% EC की 200 मिली  मात्रा प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

इसके अलावा organic माध्यम जैसे बवेरिया बेसियाना (Beauveria bassiana) मित्र फफूंदनाशी @ 250 ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर दे|

 आपका कोई भी सुझाव या जानकारी सहृदय आमंत्रित है| कमेन्ट करके जरूर बताए ....धन्यवाद🙏

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