खजूर पेड़ से अच्छी गुणवत्ता के फल के लिए फल पकाव stage में वर्षा नहीं होनी चाहिए या बहुत कम वर्षा होनी चाहिए.| देश में मानसून की शुरुआत जून महीने से हो जाती है साथ की खजूर फल पकाव भी होने लगता है, और humidity के कारण फल खराब हो जाते हैं| अतः भारत देश में तुड़ाई अधिकतर डोका अवस्था में ही कर ली जाती है| राजस्थान और गुजरात के रेगिस्तान इलाके में स्थित जिलों में खजूर की अच्छी उपज ली जा सकती है|
देश में खजूर की प्रमुख किस्में (Major varieties of date palm in India)👇
खुनेजी किस्म (Khuneji Khajur):👉 इसके फल डोका stage
में लाल रंग के तथा मीठे होते हैं, जो देखने
में attractive होते है|
इसके फल डोका अवस्था में ताजा खाने के लिए उपयुक्त है| फलों
का गूदा कुरकुरा तथा स्वादिष्ट होता है. फल का औसत वजन 10.2
ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ यानी total solubilized Solid की
मात्रा 43% होती है, जो
जल्दी पक कर यानि जून महीने से तैयार हो जाते हैं. इस किस्म से fresh
और पिण्ड (Pind) दोनों तैयार किए जा सकते है|
औसत उपज 60-80 किलो प्रति पेड़ है|
बरही किस्म (Barhee Khajur):👉 इस किस्म की उत्पत्ति इराक से हुई है. यह किस्म अपने फल मध्यम आकार के और डोका अवस्था में सुनहरे पीले रंग के रखती हैं, जो मीठे एवं स्वादिष्ट होते हैं. फल का औसत वजन 13.6 ग्राम, कुल घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS) 31.5 % होता है, TSS फल की मिठास बताता है| यह मध्यम देरी से पकने वाली किस्में है| इसके पके फल बहुत मुलायम होते हैं और इस stage पर बारिश होने से काफी नुकसान होता है. इस किस्म से सकर्स या ओफशूट (Offshoot) का उत्पादन कम (normally 6-7) होते है. औसत पैदावार 150-200 किलो प्रति पेड़ से हो जाती है|
मैडजूल किस्म (Medjul Khajur):👉 Medjool किस्म की उत्पत्ति मोरक्को देश से हुई है. इसके फलों का रंग डोका अवस्था में पीला नारंगी लिए हुए होता है, लेकिन इस अवस्था में फल कसैले या कडवे होते हैं| इस किस्म के फल आकार में काफी बड़े व फल का औसत वजन 23 ग्राम और कुल घुलनशील ठोस पदार्थ (Total Solubilized Solid) 34.5 % तथा फल देरी से पकते हैं| औसत उपज 75-100 किलो प्रति पेड़ है| यह किस्म छुहारा/ खारक बनाने के लिए अच्छी है|
जामली किस्म (Jamli Khajur):👉यह किस्म मध्यम से देरी में पकने वाली और अधिक पैदावार देने वाली किस्म है| फलों का रंग सुनहरा पीला होता है| टीएसएस (TSS) की बात करे तो 32% होती है और औसत उपज 80-100 किलो प्रति पेड़ हो जाती है| इस किस्म में गुच्छे का अधिकतम वजन 13.7 किलो होता है|
खदरावी किस्म (Khadravi Khajur):👉इस किस्म के फल डोका अवस्था में पीला हरापन लिए तथा कसैले होते हैं. फल का औसत वजन 12.9 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 36% होती है, फलों की परिपक्वता की अवधि मध्यम होती है. डोका अवस्था और उसके बाद की अवस्थाओं में फलों को बरसात एवं अधिक वातावरणीय नमी से नुकसान होता है| यह किस्म पिण्ड खजूर बनाने के लिए उपयुक्त है| औसत उपज 60-80 किलो प्रति पेड़ है|
खलास किस्म (Khalas Khajur):👉इस किस्म की उत्पत्ति सऊदी अरब और इराक से हुई है| इसके फल डोका अवस्था में गहरे पीले और पिण्ड अवस्था में सुनहरे भूरे होते हैं. फल आकार में लम्बे, औसत वजन 15.2 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 25% होती है| इसके फल मध्यम अवधि में पक जाते हैं. ख़लास किस्म में कीट और रोगों का प्रकोप अधिक होता है| एक पेड़ से औसत उपज 60-80 किलो हो जाती है|
सगई किस्म (Sagai Khajur):👉इस किस्म के फल पीले रंग के और डोका stage में खाने पर खस्खसाहट पैदा करते है और ज्यादा स्वादिष्ट भी नहीं होते इसलिए इनके पूरी तरह से पकने पर ही खाना चाहिये| किस्म छुहारा और पिण्ड के लिए उपयुक्त है| औसत उपज 70-100 किलो प्रति खजूर पेड़ से आती है|
हलावी किस्म (Halawi Khajur): 👉इस किस्म के फल डोका अवस्था में पीले और मीठे होते हैं, जिसमें कसैलापन बिलकुल कम होता है. फल का औसत वजन 12.6 ग्राम, कुल घुलनशील ठोस पदार्थ पदार्थ (टीएसएस) 31% होता है. किस्म के फल जल्दी mature होकर तैयार हो जाते हैं.
जाहिद खजूर किस्म (Jahidi date): 👉 इसके फल डोका अवस्था में पीले एवं कसैले होते हैं. fruit काफी solid और इसका छिलका काफी चिकना, सख्त होता है, जिससे इसके फल बारिश होने पर आसानी से खराब नहीं होते हैं. इन गुणों के कारण इसके फलों के pind अच्छे बनते हैं. फल का average weight 10.1 ग्राम तथा कुल घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा 35.5% होती है| यह variety देरी से पक कर तैयार होती हैं.
शामरन किस्म (Shamran Date): 👉 इस किस्म के फल doka stage में निचले सिरे पर हल्की बैंगनी झाई लिए पीले होते हैं और फल कसैले होते हैं. फल का औसत वजन 13.3 ग्राम और उसमें घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS) की मात्रा 34.5% होती है. फलों की Maturity मध्यम समय में होती है.
जुगलूल किस्म (Jaglul khajur):👉 इसके फल डोका अवस्था में लाल रंग के और कसैले होते हैं. फल का औसत वजन 10.7 ग्राम तथा TSS की मात्रा 28% होती है. फल देरी से पक कर तैयार होते हैं.
घनामी मेल (Ghanami Khajur male):👉यह नर की किस्म से 10-12 फूल आते है और प्रत्येक फूल में औसत 20-25 ग्राम परागण निकलते है| लेकिन इस किस्म के pollen 8-10 दिन देरी से प्राप्त होते है|
मदसरी मेल (Madsaree Khajur Male):👉इसे अल एन सिटी नाम से भी जाना जाता है| इस नर किस्म के पेड़ से 7-10 फूल आते है और प्रत्येक फूल से औसत 10-15 ग्राम परागण निकलते है| दोनों प्रकार के नर क़िस्मों से किसी भी मादा किस्मों पर pollination किया जा सकता है| नर क़िस्मों की संख्या 5% तक रखी जाती है|
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