Differences between Tissue culture, Offshoot & Seeded Date plant
Tissue culture विधि को micro propagation भी कहा जा सकता है| टिश्यू कल्चर एक ऐसी तकनीक है जिसमें पौधे के किसी भाग को लेकर laboratory में उगाया जाता है। अधिकतर पौधे के उस भाग को काम में लिया जाता है जिसमें growth अच्छी हो, यानि नई पत्तियों में.. | इन tissue को media में grow कराने के लिए Agar culture का use किया जाता है|
यह technique अधिकतर पाम पेड़ों जैसे oilpalm, date palm, नारियल में, रबड़ tree, अनार, केला, बैंगन, टमाटर, pineapple, sweet potato आदि में उपयोग ली जाती है| इस तकनीक का उपयोग डाहलिया, chrysanthemum, ऑर्किड जैसे सजावटी पौधों के उत्पादन के लिए भी किया जा रहा है।
Tissue culture technique के लाभ👇
- पहला benefit यह है कि इसमें plant के छोटे से tissue से बहुत कम समय में अधिक plant grow किए जा सकते है|
- दूसरा लाभ है कि इससे रोग मुक्त पौधा तैयार किया जा सकता है, क्योंकि sterilized laboratory में plant grow किया जाता है| और इसके process में ही अगर रोग है तो रोग मुक्त कर दिया जाता है|
- क्योंकि पौधा controlled condition में grow किया जाता है, इसलिए पौधों को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, चाहे मौसम कोई भी हो।
- टिशू कल्चर तकनीक द्वारा खजूर पौधों को उगाने के लिए बड़े स्थान की आवश्यकता नहीं होती, हां बाद में green house या shed net house में hardening जरूर की जाती है, जिसके लिए कम जगह की आवश्यकता होती है| खजूर में hardening एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें पौधे को बाहर के वातावरण में ढाला जाता है|
- और भी कई फायदे है जैसे किसी दुर्लभ पौधे के germplasm को preserve किया जा सकता है|
- इस विधि में पौधे का tissue, use किया जाता है, जिसमें अधिक उत्पादन या उस climate को सहन करने की क्षमता हो, या कुछ विशेष गुण हो, क्यों कि जिस tissue को हम grow कराएंगे उस से बने plant में उसी के गुण आएंगे|
लैब से खेत में खजूर पौधे को लगाने के लिए लगभग 3 से 5 साल तक इंतजार करना पड़ता है| जब पौधे से 2 से 3 पत्तियां आने लग जाती है और पौधे की ऊंचाई 10 से 15 cm हो जाती है, इसके अलावा तने का आधार भाग प्याज के बल्ब जितना और जड़ें विकसित हो जाने पर first hardening की जाती है| इसके बाद लगभग 1 साल तक shed net house में रखा जाता है, ताकि पौधा बाहर के वातावरण में अच्छी तरह से ढल सके, इसे second hardening कहते है| उसके बाद ही पौधा खेत में लगाने लायक होता है|
Differences between Offshoot Date Palm & Tissue culture date👇
इसमें भी tissue culture की तरह ही जिस पेड़ से ऑफशूट लिया है उसके ही गुण आते है| लेकिन खजूर पेड़ से ऑफशूट की निश्चित संख्या ही निकल पाती है, लगभग 15 से 20 offshoot पूरे जीवन काल में और वो भी 15-20 साल तक| बरही में तो लगभग 5-6 offshoot ही निकलते है| यानि tissue culture से अधिक संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते है और ऑफशूट में सीमित संख्या में|इसके अलावा दूसरा बड़ा यह अंतर है कि टिशू कल्चर से तैयार खजूर पौधा रोग मुक्त होता है लेकिन offshoot जिस पेड़ से लिया जा रहा है, यदि वहाँ रोग है तो ऑफशूट में भी रोग आने की संभावना बढ़ जाती है| लेकिन fungicide से रोग मुक्त किया जा सकता है| अब रोग तो खेत में लगे tissue culture वाले पौधे में भी आ सकता है|तीसरा सबसे बड़ा difference है कीमत का, 1 tissue culture के खजूर पौधे की कीमत लगभग 4000 से 5000 होती है, वहीं offshoot से बने पौधे की कीमत 1500 होती है| अगर हम इसमें 75 % सब्सिडी भी जोड़ ले, जो कि अब तक राजस्थान के 15 जिलों में ही है, तो 4000 का tissue culture पौधा 1000 का पड़ेगा और वही offshoot से तैयार पौधा 1500 का 25% यानि 375 रुपये में उपलब्ध होगा| दोनों तरह के पौधे 3 से 4 साल बाद फल देना शुरू कर देते है|
बीजू खजूर पौधे (Seeded date plant)👇
अब बीज से बने खजूर पौधे की भी बात कर लेते है, बीज से तैयार पौधा 50% male और 50 % female होने की संभावना रहती है| pollination के लिए मेल सिर्फ 5 % तक ही रखते है| पहले तो बीज से बने पौधे में male और female का पता लगभग 6 से 7 साल बाद चलेगा जब उसमें स्पैथ निकलेंगे| अगर वो female निकल भी गया तो भी fruit की quality insure नहीं होगी, हो सकता है वह अच्छी उत्पादन का हो या खराब उत्पादन हो| यानि वह नई variety उत्पन्न होगी|
तो हमने जाना tissue culture, offshoot और बीज से बने पौधे की गुणवत्ता के बारे में|
आप का कोई भी सुझाव या जानकारी सह्रदय आमंत्रित है, comment करके जरूर बताए धन्यवाद 👏