ट्राइकोडर्मा किसान मित्र जैविक कवक

ट्राइकोडर्मा एक जैविक फफूंदनाशी है जो मिट्टी में पाये जाने वाले कई प्रकार के हानिकारक फफूंद को नष्ट करता है| फसलों में लगने वाले जड़ सड़न, तना सड़नकॉलर रोट, उकठा यानि विल्ट, आर्द्र गलन यानि डेंपिंग ऑफ जैसे रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है| ट्राइकोडर्मा के कवकतंतु हानिकारक फफूंदी के कवकतंतुओं को लपेट कर या सीधे अन्दर घुसकर उसका रस चूस लेते हैं। इसके अलावा यह फंगस कुछ ऐसे जहरीले पदार्थ का स्राव करते है , जो सुरक्षा दीवार बनाकर हानिकारक फफूंदी से बचाते है। ट्राइकोडर्मा की सेल्फ लाइफ एक वर्ष होती है । इसलिए बाजार से पैकेट खरीदते समय date of manufacturing जरूर देख ले|

यह जैविक फफूंदनाशी सभी प्रकार की फसलों में बीज उपचार, मिट्टी उपचार, जड़ो का उपचार तथा ड्रेंचिंग के लिए उपयोग किया जाता है| यह विभिन्न फसलों जैसे कपास, चना, जीरा, सब्जीवर्गीय फसलें, दलहनी फसले, लगभग सभी प्रकार की फसलों में उपयोग किया जा सकता है|  

अब बात करते है, ट्राइकोडर्मा को कैसे उपयोग करे (How to use Trichoderma)👇

यह जैविक फफूंदनाशी बीज उपचार, मिट्टी उपचार तथा खड़ी फसल में किसी भी अवस्था में उपयोग किया जा सकता है|

बीज उपचार (Seed treatment)👉 करने के लिए लिए 5-10 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति किलो बीज दर से बीज उपचार किया जाता है| इसके लिए पानी में गुड मिलाकर गर्म कर गाढ़ा घोल तैयार कर ले| इस घोल को ठंडा होने के बाद इसमें ट्राइकोडर्मा पाउडर मिला दे| उसके बाद बीज को इस गाढ़ें घोल में मिलाकर पतली परत चढ़ा ले| इससे लगभग सभी प्रकार की बीजजनित रोगों की रोकथाम के लिए प्रयोग किया जाता है| 

ड्रेंचिंग या जड़ के स्थान पर दवा देने के लिए 1 किलो ट्राइकोडेरमा और 2 किलो गुड को 100 लीटर पानी में मिलाकर अच्छी तरह से हिलाए और 2 दिन बाद इस पानी को पौधों की जड़ों के पास दिया जा सकता है जिससे पौधे को मृदा जनित रोगों से बचाया जा सकता है|

इसके अलावा मिट्टी उपचार (Soil treatment)👉 भी है जिसके लिए 1 किलो ट्राइकोडर्मा को 25 किलो अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर एक एकड़ खेत में मिलाया जा सकता है| इसके लिए सबसे पहले छायादार स्थान में ट्रकोडर्मा को गोबर की खाद में अच्छी तरह से मिला दे और ऊपर बोरी से ढक कर हल्का गीला कर दे और हर तीसरे दिन इसे हल्का गीला किया जाता है| लगभग 20 दिन बाद इस गोबर की खाद पर हल्की हरी फंगस develop हो जाती है इसलिए 10 दिन पर खाद को पलट देना चाहिए ताकि ट्राइकोडेरमा फंगस अच्छी तरह से वृद्धि कर सके| अंत में इस खाद को खेत में मिलाकर सिंचाई कर देना चाहिए| 

टाइकोडर्मा मित्र फफूंदनाशी को किसी भी रसायनिक फफूंदनाशी के साथ नही मिलाना चाहिए तथा टाइकोडर्मा मित्र फफूंदनाशी के 10 दिन पहले या बाद रसायनिक फफूंदनाशी का प्रयोग मिट्टी उपचार के लिए नही करें अन्यथा टाइकोडर्मा का असर खत्म हो जाएगा| क्योंकि टाइकोडर्मा स्वयं एक फफूंदनाशी है|

बाजार में 2 प्रकार की ट्राइकोडर्मा की जाति से निर्मित उत्पाद पाये जाते है| जिसमे पहली है Trichoderma viride और  Trichoderma harzianum, इसमें harzianum थोड़ा गरम इलाको पर भी अच्छा काम करता है|

आपका कोई भी सुझाव या जानकारी सहृदय आमंत्रित है| कमेन्ट करके जरूर बताए ....धन्यवाद🙏

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Hi, This is Hemant Verma from Jodhpur, Rajasthan & M.Sc Agriculture From AAU Anand Gujarat. I am here for bring prosperity in Farming Community So Welcome to Agriculture Professional. Our Services are- Providing Agriculture Knowledge, Updating Agriculture News and Finding Solutions on agriculture related problems.

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